दुबई / वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बारूद सुलग उठा है। अमेरिका के हवाई हमलों के जवाब में ईरान के अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने रविवार को बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। इस बड़े हमले के बाद ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपनी कार्रवाई नहीं रोकी, तो युद्ध समाप्त करने के लिए चल रही शांति वार्ता को पूरी तरह से ठप कर दिया जाएगा।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया है कि इस जॉइंट ऑपरेशन में उन्होंने कुवैत और बहरीन में आठ अमेरिकी मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ओमान के पास जहाजों की आवाजाही के लिए एक नए वैकल्पिक मार्ग के विस्तार की घोषणा की गई थी, जिसे लेकर तेहरान पहले से ही भड़का हुआ था।
ग्राउंड रिपोर्ट: ‘अल-असद’ बेस दहल उठा, खाड़ी देशों में हाई अलर्ट
दुबई और कुवैत से मिल रही जमीनी रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार तड़के आसमान मिसाइलों की रोशनी और धमाकों की आवाज से गूंज उठा। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल दस्ते ने सीधे कुवैत में मौजूद अमेरिकी थल सेना के अहम ठिकानों और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) को टारगेट किया।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड, जो सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई के प्रति जवाबदेह है, उसने खुलकर इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। गार्ड ने दोटूक शब्दों में कहा:
“दुश्मन को यह साफ पता होना चाहिए कि युद्धविराम का जरा सा भी उल्लंघन… शांति के लिए जारी मौजूदा प्रक्रियाओं को पूरी तरह से रोक देगा।”
ट्रंप की दोटूक: ‘फिर उल्लंघन हुआ तो ईरान का अस्तित्व मिट जाएगा’
इस भीषण हमले से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में ही ईरान के मिसाइल-ड्रोन केंद्रों और तटीय रडार साइटों को नष्ट किया था।
ट्रंप ने तेहरान को अंतिम चेतावनी देते हुए लिखा:
“एक वक्त ऐसा आ सकता है, जब अमेरिका के लिए संयम बरतना मुमकिन नहीं होगा। हम सैन्य कार्रवाई के जरिए काम पूरा करने के लिए मजबूर हो जाएंगे और अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामी गणराज्य ईरान का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।”
होर्मुज जलमार्ग का विवाद और कतर की मुश्किल
दरअसल, इस ताजा विवाद की जड़ पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘किकू’ पर हुआ हमला है। यह पोत कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहा था और ओमान के पास नए समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करने की कोशिश में था। कतर इस पूरी जंग में अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है, ऐसे में उसके तेल टैंकर पर हमला कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
अमेरिका का कहना है कि ईरान के पास युद्धविराम का पालन करने का पूरा मौका था, लेकिन उसने शांति के बजाय जंग को चुना। वहीं ईरान का दावा है कि दुनिया के एक-चौथाई तेल और गैस व्यापार को नियंत्रित करने वाले होर्मुज जलमार्ग पर सिर्फ और सिर्फ उसका नियंत्रण होना चाहिए।
बहरीन और कुवैत की आधिकारिक प्रतिक्रिया: ‘यह संप्रभुता पर हमला’
हमले के तुरंत बाद कुवैत की सेना ने बयान जारी कर बताया कि उनकी एयर डिफेंस प्रणालियों ने ईरान की तरफ से आ रहे कई मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन को आसमान में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
दूसरी ओर, बहरीन के विदेश मंत्रालय ने बेहद कड़े शब्दों में इस हमले की निंदा की है। बहरीन सरकार ने कहा:
“यह बेहद खतरनाक स्थिति है। इससे साफ है कि तेहरान की यह आक्रामकता कोई तात्कालिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के खिलाफ एक सोची-समझी नीति का हिस्सा है।”
पेंटागन और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) इस समय बहरीन और कुवैत में हुए नुकसान का सटीक आकलन कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने वार्ता की मेज से पैर पीछे खींचे, तो मिडिल ईस्ट में एक फुल-स्केल रीजनल वॉर शुरू हो सकती है। आने वाले 24 घंटे वैश्विक अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए बेहद नाजुक होने वाले हैं।



