गिरिडीह: झारखंड की राजनीति में शनिवार देर रात एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गिरिडीह से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का हार्ट अटैक से असामयिक निधन हो गया। उनके अचानक निधन की खबर से झामुमो कार्यकर्ताओं, समर्थकों और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

सुबह JMM जिला कार्यालय पहुंचा पार्थिव शरीर
रविवार सुबह करीब 7:30 बजे सुदिव्य कुमार सोनू का पार्थिव शरीर अस्पताल से बस स्टैंड के समीप स्थित झामुमो के गिरिडीह जिला पार्टी कार्यालय लाया गया। अपने लोकप्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग कार्यालय पहुंचे।इस दौरान पूरा माहौल गमगीन नजर आया। लोगों ने नम आंखों से अपने नेता को श्रद्धांजलि दी और उन्हें अंतिम विदाई दी।
नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि
सुदिव्य कुमार सोनू के अंतिम दर्शन के लिए गिरिडीह की महापौर प्रमिला मेहरा, उप महापौर सुमित कुमार, झामुमो जिला अध्यक्ष संजय सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय पहुंचे।नेताओं ने उनके पार्थिव शरीर पर झामुमो का झंडा ओढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों के बीच गहरा दुख और मायूसी देखने को मिली।

छात्र आंदोलन से बनाई थी राजनीतिक पहचान
सुदिव्य कुमार सोनू ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र आंदोलन से की थी। प्रखर वक्ता और जुझारू नेता के रूप में उन्होंने झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।2019 में उन्होंने पहली बार गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 2024 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।
कई महत्वपूर्ण विभागों की संभाल रहे थे जिम्मेदारी
सरकार में सुदिव्य कुमार सोनू को कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी। वे नगर विकास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य जैसे विभागों से जुड़े दायित्व संभाल रहे थे।झामुमो संगठन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। राजनीतिक स्तर पर उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था।

छात्र आंदोलन के दौरान भी निभाई अहम भूमिका
झारखंड में हाल के दिनों में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान भी सुदिव्य कुमार सोनू सरकार और युवाओं के बीच संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी बने थे। उन्होंने छात्रों और युवाओं से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश की थी।एक सक्रिय विधायक, कैबिनेट मंत्री और झामुमो के समर्पित नेता के रूप में उनका अचानक निधन झारखंड की राजनीति और गिरिडीह के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।उनके निधन से झामुमो के साथ-साथ उनके समर्थकों और आम लोगों में भी गहरा शोक है। उनके जाने से झारखंड की राजनीति में पैदा हुई यह कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।


